
Source: Wikimedia Commons (CC BY 3.0) / Image: Bollywood Hungama
भारतीय सिनेमा और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद और हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। अपनी बुलंद आवाज, कड़क शख्सियत और खौफनाक विलेन की भूमिकाओं से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले दिग्गज अभिनेता प्रदीप रावत अब हमारे बीच नहीं रहे। 74 वर्ष की आयु में उन्होंने मुंबई के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली।
फिल्म ‘गजनी’ में मुख्य खलनायक ‘गजनी धर्मात्मा’, फिल्म ‘लगान’ में देशभक्त देव सिंह (देवा), और बी.आर. चोपड़ा की ‘महाभारत’ में ‘अश्वत्थामा’ का यादगार किरदार निभाने वाले प्रदीप रावत के निधन की खबर आते ही पूरे बॉलीवुड, साउथ फिल्म इंडस्ट्री और उनके लाखों फैंस के बीच शोक की लहर दौड़ गई है। आइए जानते हैं इस दुखद खबर की पूरी सच्चाई, उनके निधन की मुख्य वजह और अभिनेता प्रदीप रावत के 40 साल लंबे शानदार फिल्मी सफर के बारे में।
प्रदीप रावत के मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी ने उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह दिग्गज अभिनेता पिछले कुछ समय से ब्लड कैंसर (Blood Cancer) जैसी गंभीर बीमारी से जंग लड़ रहा था।
कैंसर का दोबारा हमला (Relapse): उनके मैनेजर ने जानकारी दी कि प्रदीप रावत ने लगभग 4 साल पहले कैंसर को हरा दिया था और वे पूरी तरह ठीक हो चुके थे। लेकिन लगभग डेढ़ महीने पहले उन्हें कैंसर का दोबारा अटैक (Relapse) हुआ।
तबीयत में गिरावट: कैंसर दोबारा उभरने के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान अचानक उनके ब्लड प्लेटलेट्स बहुत तेजी से गिरने लगे और उन्हें रिकवर होने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
निधन का समय: 4 अगस्त की शाम लगभग 6:00 से 6:30 बजे के बीच उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली। अपने अंतिम पलों में वे अपनी पत्नी कल्याणी रावत और अपने परिवार के सदस्यों के बीच थे।
“वे पिछले एक महीने से लगातार अस्पताल में भर्ती थे। अचानक उनके प्लेटलेट्स काउंट काफी नीचे चले गए थे और शरीर दवाइयों पर रिस्पॉन्स नहीं कर पा रहा था।”
प्रदीप रावत के पार्थिव शरीर को प्रशंसकों और फिल्मी हस्तियों के अंतिम दर्शन के लिए उनके गोरेगांव वेस्ट स्थित निवास स्थान (इंपीरियल हाइट्स) पर रखा गया था। इसके बाद जोगेश्वरी वेस्ट स्थित ओशिवारा श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया गया।फिल्म ‘लगान’ में उनके सह-कलाकार रहे अभिनेता यशपाल शर्मा ने सोशल मीडिया पर सबसे पहले श्रद्धांजलि देते हुए लिखा: “प्रदीप रावत, हमारे गजनी, लगान के देवा, भगवान आपकी आत्मा को शांति दे।” (Pradeep Rawat death news) इसके अलावा साउथ और हिंदी सिनेमा के कई बड़े कलाकारों ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।
21 जनवरी 1952 को जन्मे प्रदीप रावत भारतीय सिनेमा के उन गिने-चुने अभिनेताओं में से एक थे, जिन्होंने हिंदी फिल्मों के अलावा साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री (तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम) में भी अपनी अभिनय क्षमता का परचम लहराया।अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले प्रदीप रावत बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) में सरकारी नौकरी किया करते थे। लेकिन बचपन से ही एक्टिंग और थिएटर के प्रति उनका जुनून उन्हें मुंबई खींच लाया। उन्होंने वर्ष 1985 में फिल्म ‘ऐतबार’ और ‘मेरी जंग’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी।
प्रदीप रावत ने अपने 40 वर्षों से भी लंबे करियर में सैकड़ों फिल्मों और टीवी शोज में काम किया, लेकिन निम्नलिखित 3 किरदारों ने उन्हें सिनेमा इतिहास में हमेशा के लिए अमर बना दिया:
1. ‘महाभारत’ का अश्वत्थामा (1988)प्रदीप रावत को सबसे पहली और सबसे बड़ी पहचान बी.आर. चोपड़ा के ऐतिहासिक पौराणिक धारावाहिक ‘महाभारत’ से मिली थी। इस शो में उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र ‘अश्वत्थामा’ का मुख्य किरदार निभाया था। उनकी कड़क आवाज, लंबी-चौड़ी कद-काठी और दमदार अभिनय ने उन्हें भारत के हर घर में मशहूर बना दिया था।
2. ‘लगान’ का देवा (2001)आशुतोष गोवारिकर की ऑस्कर-नॉमिनेटेड ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘लगान’ में प्रदीप रावत ने ‘देवा’ का किरदार निभाया था। विलेन की भूमिकाओं से अलग, इस फिल्म में उनका एक निष्ठावान और बहादुर देशभक्त का रूप दर्शकों को बेहद पसंद आया था। क्रिकेट मैच में उनकी गेंदबाजी और बल्लेबाजी के सीन्स आज भी फैंस के पसंदीदा हैं।
3. ‘गजनी’ का खौफनाक विलेन (2005 और 2008)प्रदीप रावत के फिल्मी करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट फिल्म ‘Ghajini’ साबित हुई।निर्देशक ए.आर. मुरुगाडॉस ने वर्ष 2005 में जब तमिल में ‘गजनी’ (सूर्या स्टारर) बनाई, तो उसमें मुख्य विलेन ‘गजनी धर्मात्मा’ का रोल प्रदीप रावत को दिया।जब 2008 में आमिर खान के साथ इसका हिंदी रीमेक बना, तब भी मेकर्स ने विलेन के रोल के लिए प्रदीप रावत पर ही भरोसा जताया। पर्दे पर उनके इस खौफनाक किरदार ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए थे।
फिल्म ‘गजनी’ की अभूतपूर्व सफलता के बाद प्रदीप रावत साउथ इंडियन सिनेमा (विशेषकर टॉलीवुड) के सबसे महंगे और मांग वाले विलेन बन गए थे।सई (Sye – 2004): दिग्गज निर्देशक एस.एस. राजामौली की इस फिल्म में उनके द्वारा निभाया गया ‘भिक्षु यादव’ का किरदार आज भी मील का पत्थर माना जाता है। इस रोल के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट विलेन अवॉर्ड (तेलुगु) से नवाजा गया था।इसके अलावा उन्होंने छत्रपति (प्रभास), विक्रमार्कुडू (रवि तेजा), नायाक (राम चरण), और बद्रीनाथ जैसी ब्लॉकबस्टर साउथ फिल्मों में अपनी खलनायकी से सभी को हैरान कर दिया था।उनकी आखिरी हिंदी फिल्मों में विक्की कौशल स्टारर फिल्म ‘छावा’ भी शामिल रही।
प्रदीप रावत जी का इस तरह अचानक चले जाना भारतीय सिनेमा जगत के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। एक कलाकार जो पर्दे पर जितना खतरनाक और क्रूर विलेन नजर आता था, वास्तविक जिंदगी में वह उतना ही सरल, सौम्य और नेक दिल इंसान था। उनकी दमदार डायलॉग डिलीवरी, भारी आवाज और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को सिनेमा प्रेमी हमेशा मिस करेंगे।हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके शोक संतप्त परिवार को इस अपार दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति! 🙏
उत्तर: अभिनेता प्रदीप रावत का निधन 4 अगस्त की शाम को 74 वर्ष की आयु में ब्लड कैंसर का दोबारा अटैक (Relapse) होने के कारण हुआ।
उत्तर: उन्होंने हिंदी और तमिल दोनों ‘गजनी’ फिल्मों में मुख्य विलेन ‘गजनी धर्मात्मा’ का टाइटल रोल निभाया था।
उत्तर: बी.आर. चोपड़ा के प्रसिद्ध धारावाहिक ‘महाभारत’ में उन्होंने द्रोणाचार्य के पुत्र ‘अश्वत्थामा’ का किरदार निभाया था।
उत्तर: उन्हें एस.एस. राजामौली की तेलुगु फिल्म ‘सई’ (Sye) में ‘भिक्षु यादव’ के रोल के लिए फिल्मफेयर बेस्ट विलेन अवॉर्ड मिला था।
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